राजनीति

आयकर के बाद अब सीबीआई के रडार पर दिग्विजय और कमलनाथ के कई करीबी, बढ़ सकती हैं मुश्किलें

Share with:


Kamal Nath, Digvijay Singh – फोटो : (File)

अमर उजाला रिर्पोट के अनुसार चुनाव के माहौल के बीच बड़ी रकम की लेनदेन के मामले में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबियों की मुश्किलें कम नहीं हुई है। अप्रैल में हुई आयकर विभाग की ताबड़तोड़ छापेमारियों के बाद इकट्ठा किए गए सबूत और रिपोर्ट सीबीआई को भेज दिए गए हैं। इस मामले में बड़ी कार्रवाई हो सकती है। वहीं, दूसरी ओर कमलनाथ ऐसे आरोपों को खारिज कर चुके हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, आयकर विभाग ने चुनाव आयोग को जो साक्ष्य और जांच रिपोर्ट सौंपी है, वह हाल ही में खत्म हुए लोकसभा चुनाव के दौरान 11 कांग्रेस प्रत्याशियों को कथित तौर पर भारी रकम ट्रांसफर किए जाने की ओर इशारा करती है। आरोप ये भी है कि ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी को 20 करोड़ रुपये की रकम का भुगतान किया गया।

जांचकर्ताओं के रिकॉर्ड से पता चलता है कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और इस बार भोपाल से चुनाव लड़ने वाले दिग्विजय सिंह उन प्रत्याशियों की सूची में शीर्ष पर हैं, जिन्हें तलाशी अभियान की जद में आए लोगों से चुनाव के लिए फंड मिले थे। आयकर विभाग की रिपोर्ट के अनुसार ये जानकारी ललित कुमार चलानी नामक शख्स के कम्प्यूटर से मिली है। वह एक सीए हैं, जो कमलनाथ के पूर्व सहयोगी आरके मिगलानी और प्रवीड़ कक्कड़ के साथ काम कर चुके हैं।

आयकर विभाग के दस्तावेजों के अनुसार ललित के जरिए कथित तौर पर लोकसभा प्रत्याशियों को 25-30 लाख रुपये की रकम मिली। अकेले दिग्विजय सिंह को ही 90 लाख रुपये मिले। वहीं भुगतान से जुड़ी रसीदें महज दो मामलों में मिली हैं। पहली सतना से राजाराम त्रिपाठी और दूसरी बालाघाट से मधु भगत। इस मामले पर चुनाव आयोग का कहना है कि लोकसभा चुनाव के दौरान प्रत्याशियों ने जो खर्च किया है, उसका लेखा-जोखा जून के आखिर तक आ जाएगा, इसके बाद कोई कार्रवाई की जाएगी। 

जिन अन्य लोकसभा प्रत्याशियों को फंड मिलने का आरोप हैं, उनमें मंदसौर से मीनाक्षी नटराजन, मंडला से कमल माडवी, शहडोल से प्रमिला सिंह, सीधी से अजय सिंह राहुल, भिंड से देवाशीष जरारिया, होशंगाबाद से शैलेंद्र सिंह दीवान, खजुराहो से कविता सिंह नटिराजा और दामोह से प्रताप सिंह लोधी शामिल हैं। वहीं विधानसभा चुनाव में फंडिंग के मामले में आयकर विभाग का निष्कर्ष ये है कि एक समूह द्वारा 17.9 करोड़ रुपये की रकम 87 प्रत्याशियों को दी गई थी, जिनमें से 40 को जीत मिली।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री कमलनाथ का इसपर कहना है कि उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है। उनका कहना है कि ये मामला सीबीआई को भेजने दें, इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। आयकर विभाग के निष्कर्ष में ये बात भी सामने आई है कि मध्यप्रदेश में सरकारी विभागों से बड़े पैमाने पर पैसा जुटाया गया। इस मामले में जानकारी कमलनाथ के पूर्व ओएसडी प्रवीड़ कक्कड़ के फोन के व्हाट्सएप संदेशों से भी मिली है।

आयकर विभाग की जांच के अनुसार दावा है कि परिवहन विभाग के नाम पर 54.45 करोड़, एक्साइज विभाग के नाम पर 36.62 करोड़, खनन विभाग के नाम पर 5.50 करोड़, लोक निर्माण विभाग के नाम पर 5.20 करोड़ और सिंचाई विभाग के नाम पर चार करोड़ रुपये कथित तौर पर ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी को ट्रांसफर किए गए। वहीं चलानी के फोन से मिले सबूतों से पता चलता है कि 17 करोड़ रुपये कथित तौर पर ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी को ट्रांसफर किए गए थे। इन पैसों का इस्तेमाल लोकसभा चुनाव में होना था।

Leave a Reply

Your email address will not be published.